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We cannot change the circumstances in which our soul chose to be born, but we can definitely change the circumstances in which we grow.ASTROLOGY, VASTU SASTRA, AURA, AROMA. SHIVYOG,ARTOF LIVING, ISHAYOG,OSHO AND NEWAGE MEDITATION अध्यात्म, ज्योतिष, यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र, वेद, पुराण, इतिहास, गुढ़-रहस्य समस्त समस्या का निराकरण सम्भव नहीं है, मात्र कुछेक समस्या का ही समाधान सम्भव है। Accurate Horoscope Analysis and Remedies for All Problems Email us at lalkitabamrit@rediffmail.commalhotrasubhashhttp://www.blogger.com/profile/12453811351942282454noreply@blogger.comBlogger3442125
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ग्रहों की चाल ठीक करें जड़ों से

Wed, 06/19/2013 - 13:12
ग्रहों की चाल ठीक करें जड़ों से

हम सभी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि हमे नौ ग्रह और सत्ताईस नक्षत्र किसी न किसी तरह से प्रभावित अवश्य करते है. अधिकांश ग्रह हमें सकारात्मक रूप से ही प्रभावित करते हैं तभी हमारा जीवित रह पाते हैं. यदि कोई ग्रह हमें नकारात्मक रूप से प्रभावित कर भी रहा है तो उसका ज्योतिष अनुरूप उपाय कर के ठीक किया जा सकता है. मंत्र जाप,ग्रह से सम्बन्धित देव की आराधना और ग्रह सम्बन्धित पदार्थों का दान तो प्रचलित उपाय है ही साथ ही सबसे आसान होता है रत्न धारण करना.

हालांकि रत्न सबके लिये सुलभ नही हैं क्योंकि ये महंगे होते हैं और इनकी प्रामाणिकता को लेकर भी सन्देह बना रहता है. रत्न मुख्यत: प्रकाश के अपवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं और स्नायु तंत्र को अपने प्रकाश के अपवर्तन और रंग के स्वरूप के अनुरूप प्रभावित करते है.
रत्नों की प्रामाणिकता और शुद्धता को लेकर सन्देह हर समय बना रहता है,और प्रत्येक व्यक्ति के लिये शुद्ध रत्न खरीद पाना भी असम्भव होता है,क्योंकि रत्नों के मूल्य बहुत ज्यादा होते हैं. ज्योतिष का एक क्षेत्र एेसा भी है जहाँ प्रत्येक वर्ग व्यक्ति के लिये समाधान है,वह है वनस्पति और जड़ों को धारण कर के अपने ग्रहयोगों को सुधारना. यह बहुत सस्ता,प्रभावशाली और सहज उपाय है जिसमें ग्रहों के अनुसार जड़ों और वनस्पतियों को विभक्त किया गया है. Þशारदा तिलकÞ और अन्य कई मध्य युगीन ग्रंथों में इस उपाय का उल्लेख मिलता है. एक निश्चित प्रक्रिया के अनुसार यदि अपनी राशि,नक्षत्र और कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुरूप जड़ों को धारण किया जाये तो विस्मयकारी तरीके से लाभ होता है आपकी कुंडली में जो ग्रह आपके लिये हितकारी और प्रगतिकारक हैं उनका किसी अच्छे ज्योतिष से निर्धारण करा कर उस के अनुरूप जड़ को शुद्ध कर के,उस ग्रह से सम्बंधित दिन मंत्रों का जाप कर के धारण करें और प्रतिदिन जाप करते रहें तो निश्चित लाभ होता है.
सूर्य
यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का होकर तुला राशि में है और केंद्र में या लग्नस्थ है तो कृत्तिका नक्षत्र वाले दिन बेल का एक जड़ प्रात:काल तोडक़र,शिवालय में शिवजी को समर्पित करें और ऊँ भास्कराय ह्रीं मंत्र का जाप करने के पश्चात गुलाबी धागे से धारण करें. प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहें. रोग,संतानहीनता जैसी अन्य कई समस्याओं का समाधान होगा.
चंद्र
यदि आप की कुंडली में चंद्र नीच का होकर वृश्चिक राशि में है,या राहु,केतु और शनि द्वारा प्रभावित है तो, रोहिणी नक्षत्र वाले दिन खिरनी की जड़, शुद्ध करके शिवजी को समर्पित करें और ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम: मंत्र का जाप कर के सफेद धागे में धारण करें. फेफड़े सम्बंधित रोग,एकाकीपन और भावनात्मक समस्याओं का समाधान होगा.
मंगल
आपकी कुंडली में मंगल नीच का होकर कर्क राशि में हो या आप मांगलिक हों तो मृगशिरा नक्षत्र वाले दिन अनंतमूल की जड़ शुद्धिकरण के पश्चात हनुमान जी की पूजा कर के ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कर के नारंगी धागे से धारण करें. क्रोध,अवसाद और वैवाहिक बाधा से मुक्ति मिलेगी
बुध
यदि आपकी कुंडली में बुध द्वादश,अष्टम भाव में या नीच का होकर मीन राशि में है, तो आप आश£ेषा नक्षत्र वाले दिन विधारा की जड़ गणेश भगवान को को समर्पित करने के पश्चात ऊँ बुं बुधाय नम: मंत्र का जाप कर के हरे रंग के धागे में धारण करें. इस से बुद्धि विकसित होगी तथ निर्णय लेने में हो रही त्रुटि का भी समाधान होगा.
गुरु
आपकी कुंडली में यदि गुरु रहु द्वरा युक्त है,राहु द्वारा ²ष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है,तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गाँठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करके धारण करें. व्यवसाय,नौकरी,विवाह सम्बन्धी समस्या और लीवर सम्बन्धी रोगों में लाभ होगा.
शुक्र
यदि आपकी कुंडली में शुक्र अष्टम भाव में है या नीच का होकर कन्या राशि में है, तो आप सरपोंखा की जड़, भरणी नक्षत्र वाले दिन सफेद धागे से सायंकाल के समय लक्ष्मी जी का पूजन कर ऊँ शुं शुक्राय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. संतानहीनता,कर्ज की अधिकता और धन के अभाव जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी.
शनि
आपकी कुंडली में यदि शनि सूर्य युक्त है,सप्तम भाव में है या नीच का होकर मेष राशि में है तो आप अनुराधा नक्षत्र वाले दिन बिच्छू या बिच्छौल की घांस को नीले धागे से काली जी की पूजा के पश्चात ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. कार्यों में हो रहे विलम्ब,कानूनी अड़चन और रोगों से मुक्ति मिलेगी.
राहु
आपकी कुंडली में राहु लग्न,सप्तम या भाग्य स्थान मे है, तथा शुभ ग्रहों से युक्त है तो आप आद्र्रा नक्षत्र वाले दिन चन्दन की लकड़ी का टुकड़ा शिव जी का अभिषेक कर के भूरे धागे में ऊँ रां राहुए नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. रोग,चिड़चिड़ापन,क्रोध,बुरी आदतों तथा अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी.
केतु
यदि आपकी कुंडली में केतु,चन्द्र या मंगल युक्त होकर लग्नस्थ है, तो आप अश्विनी नक्षत्र वाले दिन गणेश जी का पूजन करने के पश्चात शुद्ध की हुई असगन्ध या अश्वगन्धा की जड़, ऊँ कें केतवे नम: मंत्र का जाप करने के पश्चात, नारंगी धागे से धारण करें. चर्म सम्बन्धी रोग,किडनी रोगों और वैवाहिक समस्याओं में लाभ होगा.
याद रखें कि समस्या की पूर्ण मुक्ति के लिये, आपको मंत्रों का जाप प्रतिदिन करना होगा.
ग्रह और उनसे सम्बन्धित दान समग्री
यदि आपको कोई ग्रह परेशान कर रहा है,तो सम्बन्धित जड़ को धारण करने के पश्चात उस से सम्बन्धित वस्तुओं का गरीब और असहाय लोगों को दान करने से भी लाभ होता है:
सूर्य : माणिक्य, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चंदन, गुड़, केसर अथवा तांबा.
चंद्र : बांस की टोकरी, चावल, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, घी से भरा पात्र, चांदी, मिश्री, दूध, दही.
मंगल : मूंगा, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, कनेर पुष्प, गुड़, तांबा, लाल चंदन, केसर.
बुध : हरे मूंग, हरा वस्त्र, हरा फल, पन्ना, केसर, कस्तूरी, कपूर, घी, मिश्री, धार्मिक पुस्तकें.
गुरू : घी, शहद, हल्दी, पीत वस्त्र, शास्त्र पुस्तक, पुखराज, लवण, कन्याओं को भोजन.
शुक्र : सफेद वस्त्र, श्वेत स्फटिक, चावल, सुगंधित वस्तु, कपूर, अथवा पुष्प, घी- शक्कर- मिश्री-दही.
शनि : तिल, सभी तेल, लोहा धातु, छतरी, काली गाय, काला कपड़ा, नीलम, जूता,कंबल.
राहु : गेहूं, उड़द, काला घोड़ा, खडग़, कंबल, तिल, लौह, सप्त धान्य, अभ्रक.
केतु : तिल, कंबल, काला वस्त्र तथा पुष्प, सभी तेल, उड़द, काली मिर्च, सप्तधान्य.
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पुजा - पाठ

Sat, 06/08/2013 - 14:09
पुजा - पाठ कैसे करे ?
1- पुजा घर ईशान कोण मे हो …॥
2- पुजा करने वाले का मुख उत्तर या पुर्व दिशा मे हो ।
3- गणेश, कुबेर और दुर्गा का मुख पश्चिम दिशा मे और हनुमान जी का नैॠत्य कोण मे हो ।
4- शयनकक्ष मे पुजा घर न हो, अगर स्थानाभाव हो तो पुजा घर मे पर्दा लगा ले।
5- शयनकक्ष मे उत्तर और पुर्व दिशा मे पुजा घर हो ।
6- उग्र और तामसी शक्तियो कि मुर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा मे हो ।
7- सोते समय व्यक्ति का सिर पुर्व दिशा मे हो, ताकि सोते समय पैर भगवान हि तरफ़ न हो।
8- पुजा घर के आस पास या उपर- निचे शौचालय न बनाये ।
9- घर की सीढीयो के नीचे पुजा घर न हो ।
10- पुजा घर मे 1 से 12 अंगुल तक की मुर्ति का पूजन करे।
11- मिट्टी की बनी मुर्ति किसी भी देवता की हो 3 दिन से अधिक नही रखनी चाहिये। इससे घर मे दरिद्रता, मारपीट, झगडा,रोग, व्याधि आती है।
12- घर मे चल मुर्ति की स्थापना न करे।
13- चल हो या अचल मुर्ति मे प्राणप्रतिष्ठा अवश्य होनी चाहीये।
14- मुर्ति के निकट अधिक प्रकाश न हो ।
15- बाहरी व्यक्ति को मुर्ति के पास नही जाने देना चाहीये। इससे मुर्ति की उर्जा समाप्त होती है।
16- शक्ति की मुर्ति की पुजा रात्री 9 से 12 के भीतर और देव मुर्तियो की पुजा का समय प्रात: 4 से 6 के बीच होना चाहीये।
17- किसी भी देवी या देवता की मुर्ति दिवार से थोडी हटाकर रखनी चाहिये। और उस पर परछाई नही पडनी चाहीये।
18- गणेश जी के दाहिने और विष्णु जी के बायें लक्ष्मी जी का स्थापना करनी चाहीये।
19- धन ऐश्वर्य और शत्रु नाश के लिये चांदी के गणेश लक्ष्मी की स्थापना करनी चाहीये।
20- पुजा के कमरे के दरवाजे पर दहलीज होनी चाहीये।
21- द्वार का दरवाजा दो पल्लों का होना चाहीये।
22- पुजा के समय जलाये जानावाला दिपक यदि भूमी पर रखना हो तो उसके नीचे चावल अवश्य रखे, वर्ना घर मे चोरी हो सकती है॥
23- घी का दिपक देवता के दाहिने और तेल का दिपक बाये जलाना चाहीये॥
24- पुजा घर की दिवारो का रंग पीले या सफ़ेद रंग का हो ।
25- पुजा घर के अग्निकोण मे दिप अवश्य जलाना चाहीये।
26- हवनकुण्ड और अगरबत्ती भी अग्निकोण मे रखे।
27- देवताओ को '' तांबा '' धातु प्रिय है अत: पुजन मे तांबे की धातु के बर्तनो का ही प्रयोग करे तो उत्तम्।
28 - पुजा करते समय दिपक का स्पर्श हो जाये तो हाथ धो लेना चाहिये, अन्यथा दोष लगेगा ।
27- शिवलिंग पर चढे फ़ल,फ़ुल, नैवेद्य आदि का उपयोग न करे, उसे विसर्जित कर दे।
28- गणेश जी को तुलसी न चढायेअ ।
29- विष्णु मंदिर की 4 बार, शिव जी की आधी ,देवी की 1, सुर्य की 7 और गणेश जी की 3 परिक्रमा करनी चाहीये।
30- कन्या पुजन मे 1 वर्ष से कम और 10 वर्ष से अधिक की आयु की कन्या न हो ॥
31- प्रत्येक गृहस्थ को घर मे तुलसी का पौधा अवश्य रखना चाहीये।
32- सांयकाल मे तुलसी के नीचे दिप जलाकर 5 बार परिक्रमा करनी चाहीये।
33- घर मे मुख्य रुप से 1 ही पुजा घर हो। छोटे छोटे कई पुजाघर हो तो इससे घर के सदस्य अशान्त रहते है।
34- पुजाघर मे संत महात्मा के चित्र भी होने चाहीये ॥

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सिद्ध उपाय

Sat, 06/08/2013 - 14:08
शनि को अनुकूल करने के सिद्ध उपाय

प्रतिकूल समय को अनुकूल कैसे करें

१. खाली पेट नाश्ते से पूर्व काली मिर्च चबाकर गुड़ या बताशे से खाएं.

२. भोजन करते समय नमक कम होने पर काला नमक तथा मिर्च कम होने पर काली मिर्च का प्रयोग करें.

३. भोजन के उपरांत लोंग खाये.

४. शनिवार व मंगलवार को क्रोध न करें.

५. भोजन करते समय मौन रहें.

६. प्रत्येक शनिवार को सोते समय शरीर व नाखूनों पर तेल मसलें.

७. मॉस, मछली, मद्य तथा नशीली चीजों का सेवन बिलकुल न करें.

८. घर की महिला जातक के साथ सहानुभूति व स्नहे बरते. क्योकि जिस घर में गृहलक्ष्मी रोती है उस घर से शनि की सुख-शांति व समृद्धि रूठ जाती है. महिला जातक के माध्यम से शनि प्रधान व्यक्ति का भाग्य उदय होता है.

९. गुड़ व चनें से बनी वस्तु भोग लगाकर अधिक से अधिक लोगों को बांटना चाहिए.

१०. उड़द की दाल के बड़े या उड़द की दाल, चावल की खिचड़ी बाटनी चाहिए. प्रत्येक शनिवार को लोहे की कटोरी में तेल भरकर अपना चेहरा देखकर डकोत को देना चाहिए. डकोत न मिले तो उसमे बत्ती लगाकर उसे शनि मंदिर में जला देना चाहिए.

११. प्रत्येक शनि अमावस्या को अपने वजन का दशांश सरसों के तेल का अभिषेक करना चाहिए.

१२. शनि मृत्युंजय स्त्रोत दशरथ कृत शनि स्त्रोत का ४० दिन तक नियमित पाठ करें.

१३. काले घोड़े की नाल अथवा नाव की कील से बना छल्ला अभिमंत्रित करके धारण करना शनि के कुप्रभाव को हटाता है.

१४. जिस जातक के परिवार, घर में रिश्तेदारी, पड़ोस में कन्या भ्रूण हत्या होती है. जातक प्रयास कर इसे रोकेगा तो शनि महाराज उससे अत्यंत प्रसन्न होते है.

 शनि को अनुकूल करने के सिद्ध उपाय

प्रतिकूल समय को अनुकूल कैसे करें

१५. कपूर को नारियल के तेल में डालकर सिर में लगायें, भोजन में उड़द की दाल का अत्यधिक सेवन करें, झूठ, कपट, मक्कारी धोखे से बचे, रहने के स्थान पर अँधेरा, सूनापन व खंडहर की स्थति न होने दे.

१६. शनिवार को काले तिल का कपडछन पावडर चुटकी व दो बूंद सरसों का तेल पानी में डालकर तिलातेल स्नान करें.

१७. शनि मंदिर में काले चनें, कच्चा कोयला, काली हल्दी, काले तिल, काला कम्बल और तेल दे.

१८. शनि मंदिर में जाकर कम से कम परिक्रमा व दंडवत प्रणाम करें.

१९. १६ शनिवार सूर्यास्त्र के समय एक पानी वाला नारियल, ५ बादाम, कुछ दक्षिणा शनि मंदिर में चढायें.

२०. शनि मंदिर से शनि रक्षा कवच या काला धागा हाथ में बांधने के लिए अवश्य लें.

२१. शनि की शुभ फल प्राप्ति के लिए दक्षिण दिशा में सिराहना कर सोयें. व पश्चिम दिशा में मुख कर सारे कार्य करें व अपने देवालय में शनि का आसन अवश्य बनायेँ.

२२. प्रत्येक शुभ कार्य में पूर्व कार्य बाधा निवारण के लिए प्रार्थना करके हनुमान व शनि देव के नाम का नारियल फोड़े.

२३. प्रत्येक शनिवार को रात्रि में सोते समय आँखों में काजल या सुरमा लगायें व शनिवार का काला कपडा अवश्य पहने.

२४. महिलाओं से अपने भाग्य उदय के लिए सहयोग, समर्थन व मार्गदर्शन प्राप्त करें तो प्रगति होगी.

२५. अपनों से बड़ी उम्र वालें व्यक्ति का सहयोग प्राप्त करें व अपनी से छोटी जाती व निर्बल व्यक्ति की मदद करें.

२६. प्रति महा की अमावस्या आने से पूर्व अपने घर व व्यापार की सफाई व धुलाई अवश्य करें व तेल का दीपक जलाएं.

२७. शनि अमावस्या, शनि जयंती या शनिवार को बन पड़े तो शनि मंदिर में नंगे पैर जाएँ.

२८. घर बनाते समय काली टायल, काला मार्बल या काले रंग की कुछ वस्तु प्रयोग में लायें.

 प्रतिकूल शनि को अनुकूल कैसे करें


१. शनि देव को वृद्धावस्था का स्वामी कहा गया है, जिस घर में माता पिता व वृद्ध जनों का सम्मान होता है उस घर से शनि देव बहुत प्रसन्न होते हैं तथा जिस घर में वृद्ध का अपमान होता है उस घर से खुशहाली दूर भागती है. जैसे-जैसे व्यक्ति वृद्ध होता है उसे भूख कम लगने लगती है. नींद कम आती है वह काम वासना से विमुख हो जाता है. उसमे लोक कल्याण की भावना जाग्रत हो जाती है. ये सभी गुण देवताओं के हैं. कहने का तात्पर्य है की वृद्ध अवस्था में व्यक्ति देवत्व प्राप्त करता है. इसलिए पाठको को शनि कृपा प्राप्त करने के लिए वृद्ध जनों की सेवा सर्वोपरि है.

२. शनि को दरिद्र नारायण भी कहते हैं इसलिए दरिद्रो की सेवा से भी शनि प्रसन्न होते हैं.

३. असाध्य व्यक्ति को काला छाता, चमडे के जूते चप्पल पहनाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं.

४. शनि देव को उड़द की दाल की बूंदी के लड्डू बहुत प्रिय है अत: शनिवार को लड्डू का भोग लगाकर बांटना चाहिए.

५. शनिवार को तेल मालिश कर नहाना चाहिए.

६. लोहे की कोई वस्तु शनि मंदिर दान करनी चाहिए. वह वस्तु ऐसी हो जो मंदिर के किसी काम आ सके.

७. शनि मंदिर में बैठकर ॐ ए श्री श्री शानेश्चारय का जाप करना चाहिए.

८. शनि से उत्पन्न भीषण समस्या के लिए भगवान भोलेनाथ व हनुमान जी की पूजा एक साथ करनी चाहिए. शनि चालीसा, शिव चालीसा, बजरंगबाण, हनुमान बाहुक व हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए.

९. शनि सम्बन्धी कथा पढ़े.

१०. नीलम रत्न के साथ पन्ना रत्न भी धारण करें.

११. मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं.

१२. हर शनिवार और मंगलवार को काले कुत्ते को मीठा पराठा खिलायें.

१३. भैरव उपासना भी अनिष्ठो में सर्वाधिक लाभदायक है.

१४. ताप के रूप में शनिवार का श्री हनुमान जी व शनि मंदिर में पीपल का पेड़ हो तो संध्या के समय दीपक जलना शनि, हनुमान और भैरव जी के दर्शन अत्यंत लाभकारी है.

१५. शनि व्रत करें तथा एक समय बिना नमक का भोजन लें.












यदि आप शनि देव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आप यह छोटे-छोटे प्रयोग करें। इन प्रयोगों से शनि निश्चित ही आप से प्रसन्न होंगे और आपको मनोवांछित फल प्रदान करेगा। यहां तस्वीरों में बताए गए उपाय सभी राशि के लोग कर सकते हैं-
- कम से कम 9 शनिवार गरीबों को भोजन कराए, भोजन में शनिदेव की प्रिय भोज्य सामग्री रखें।
- घर के नौकरों, धोबी, ड्रायवर आदि से अच्छा व्यवहार रखें। क्योंकि शनि गरीबों का प्रतिनिधित्व करता है। गरीबों के खुश होने पर शनि देव स्वत: खुश हो जाते हैं।
 - प्रति शनिवार शनि के निमित्त व्रत-उपवास करें। शनिवार को शनि देव के लिए विशेष पूजा-अर्चना अवश्य कराएं।
- शुभ मुहूर्त देखकर शनि कवच धारण करें। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें। इससे भी शनि के दोष कम होते हैं।
  - प्रति शनिवार आप काले तिल से बनी सामग्री का सेवन करें। - शनि संबंधी दान या उपहार बिल्कुल ग्रहण ना करें।
- शनि का रत्न नीलम धारण करें। नीलम धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
- प्रतिदिन हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना करें। हनुमानजी के भक्तों पर शनि बुरा प्रभाव नहीं डालता है।
- प्रतिदिन या हर शनिवार इष्टदेवता को काले या नीले रंग के फूल अवश्य चढ़ाएं। 
- शनैश्चरी अमावस्या पर नदी में स्नान कर शनि के निमित्त दान पुण्य करें।






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शनि की जडी बूटियां

Sat, 06/08/2013 - 14:07
शनि की जडी बूटियां

बिच्छू बूटी की जड या शमी जिसे छोंकरा भी कहते है की जड शनिवार को पुष्य नक्षत्र में काले धागे में

पुरुष और स्त्री दोनो ही दाहिने हाथ की भुजा में बान्धने से शनि के कुप्रभावों में कमी आना शुरु हो जाता है.
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धन

Sat, 06/08/2013 - 14:06
घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए :
इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या
एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें
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शनि होगा खुश

Sat, 06/08/2013 - 14:05
शनिवार को शनि होगा खुश

यदि आप शनि देव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आप यह छोटे-छोटे प्रयोग करें। इन प्रयोगों से शनि निश्चित ही आप पर प्रसन्न होंगे और आपको मनोवांछित फल प्रदान करेगा।

- कम से कम 9 शनिवार गरीबों को भोजन कराएं, भोजन में शनिदेव के प्रिय भोज्य सामग्री रखें।
- घर के नौकरों, धोबी, ड्रायवर आदि से अच्छा व्यवहार रखें। क्योंकि शनि गरीबों का प्रतिनिधित्व करता है। गरीबों के खुश होने पर शनि देव स्वत: खुश हो जाते हैं।
- प्रति शनिवार शनि के निमित्त व्रत-उपवास करें।
- प्रति शनिवार शनि देव के लिए विशेष पूजा-अर्चना अवश्य कराएं।
- शुभ मुहूर्त देखकर शनि कवच धारण करें।
- सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
- प्रति शनिवार आपके खाने तिल से बनी सामग्री अवश्य खाएं।
- शनि का रत्न नीलम धारण करें। नीलम धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
- शनि संबंधी दान या उपहार बिल्कुल ग्रहण ना करें।
- प्रतिदिन हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना करें। हनुमानजी के भक्तों पर शनि बुरा प्रभाव नहीं डालता है।
- प्रतिदिन या हर शनिवार इष्टदेवता को काले या नीले रंग के फूल अवश्य चढ़ाएं।
- शनैश्चरी अमावस्या पर नदी में स्नान कर शनि के निमित्त दान पुण्य करें।
- पुरुष परस्त्री और स्त्री परपुरुष का साथ तुरंत छोड़ दें अन्यथा शनि और क्रूर हो जाएगा और आपको उसके बहुत बुरे फल प्राप्त होंगे।
- सारे अधार्मिक कार्य छोड़ दें।
उपरोक्त सभी प्रयोग शनि को प्रसन्न करने वाले है और यह सहज ही किए जा सकते हैं। इन प्रयोगों से आप पर शनि की कृपा जरूर होगी और अशुभ समय दूर हो जाएगा।
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राशि अनुसार

Sat, 06/08/2013 - 14:04
राशि अनुसार करें उपासना
आर्थिक समृद्घि, रुके कार्यों में प्रगति तथा न्यायिक सफलता के लिए विभिन्न राशि के जातक इन उपायों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
मेष-वृश्चिक - शनिस्तवराज या शनि स्तोत्र का पाठ करें तथा हनुमानजी को चोला चढ़ाएं.
वृषभ-तुला - शनि चालीसा या अयोध्याकांड का पाठ करें तथा रात्रि में कनकधारा स्तोत्र का पठन करें.
मिथुन-कन्या - प्रातः शनि महाराज का तिल्ली के तेल से अभिषेक कर शनि कवच का पाठ करें तथा दिन में 12 बजे गणेश सहस्त्र नामावली का पाठ करें.
कर्क - शनि पूजन के बाद भिक्षुकों को इमरती व नमकीन का दान करें.
सिंह - महाकाल शनिमृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करें तथा रोगियों को खाद्य सामग्री का वितरण करें.
धनु-मीन - शनि स्तोत्र व स्तवराज का संयुक्त पाठ तथा सुबह 11 बजे भगवान विष्णु का पंचोपचार पूजन करें.
मकर-कुंभ - शनि देव का पंचोपचार पूजन कर पुरुष सूक्त के पाठ द्वारा तिल के तेल से अभिषेक करें, शनि शतनामावली का पाठ करें, साधु-सन्यासी तथा संतों को अन्नदान दें, सायंकाल रूद्र सूक्त का पाठ अवश्य करें.
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शनि को अनुकूल

Wed, 06/05/2013 - 15:06
शनि को अनुकूल करने के सिद्ध उपाय
प्रतिकूल समय को अनुकूल कैसे करें
१. खाली पेट नाश्ते से पूर्व काली मिर्च चबाकर गुड़ या बताशे से खाएं.
२. भोजन करते समय नमक कम होने पर काला नमक तथा मिर्च कम होने पर काली मिर्च का प्रयोग करें.
३. भोजन के उपरांत लोंग खाये.
४. शनिवार व मंगलवार को क्रोध न करें.
५. भोजन करते समय मौन रहें.
६. प्रत्येक शनिवार को सोते समय शरीर व नाखूनों पर तेल मसलें.
७. मॉस, मछली, मद्य तथा नशीली चीजों का सेवन बिलकुल न करें.
८. घर की महिला जातक के साथ सहानुभूति व स्नहे बरते. क्योकि जिस घर में गृहलक्ष्मी रोती है उस घर से शनि की सुख-शांति व समृद्धि रूठ जाती है. महिला जातक के माध्यम से शनि प्रधान व्यक्ति का भाग्य उदय होता है.
९. गुड़ व चनें से बनी वस्तु भोग लगाकर अधिक से अधिक लोगों को बांटना चाहिए.
१०. उड़द की दाल के बड़े या उड़द की दाल, चावल की खिचड़ी बाटनी चाहिए. प्रत्येक शनिवार को लोहे की कटोरी में तेलभरकर अपना चेहरा देखकर डकोत को देना चाहिए. डकोत न मिले तो उसमे बत्ती लगाकर उसे शनि मंदिर में जला देना चाहिए.
११. प्रत्येक शनि अमावस्या को अपने वजन का दशांश सरसों के तेल का अभिषेक करना चाहिए.
१२. शनि मृत्युंजय स्त्रोत दशरथ कृत शनि स्त्रोत का ४० दिन तक नियमित पाठ करें.
१३. काले घोड़े की नाल अथवा नाव की कील से बना छल्ला अभिमंत्रित करके धारण करना शनि के कुप्रभाव को हटाता है.
१४. जिस जातक के परिवार, घर में रिश्तेदारी, पड़ोस में कन्या भ्रूण हत्या होती है. जातक प्रयास कर इसे रोकेगा तो शनि महाराज उससे अत्यंत प्रसन्न होते है.शनि को अनुकूल करने के सिद्ध उपाय
प्रतिकूल समय को अनुकूल कैसे करें
१५. कपूर को नारियल के तेल में डालकर सिर में लगायें, भोजन में उड़द की दाल का अत्यधिक सेवन करें, झूठ, कपट,मक्कारी धोखे से बचे, रहने के स्थान पर अँधेरा, सूनापन व खंडहर की स्थति न होने दे.
१६. शनिवार को काले तिल का कपडछन पावडर चुटकी व दो बूंद सरसों का तेल पानी में डालकर तिलातेल स्नान करें.
१७. शनि मंदिर में काले चनें, कच्चा कोयला, काली हल्दी, काले तिल, काला कम्बल और तेल दे.
१८. शनि मंदिर में जाकर कम से कम परिक्रमा व दंडवत प्रणाम करें.
१९. १६ शनिवार सूर्यास्त्र के समय एक पानी वाला नारियल, ५ बादाम, कुछ दक्षिणा शनि मंदिर में चढायें.
२०. शनि मंदिर से शनि रक्षा कवच या काला धागा हाथ में बांधने के लिए अवश्य लें.
२१. शनि की शुभ फल प्राप्ति के लिए दक्षिण दिशा में सिराहना कर सोयें. व पश्चिम दिशा में मुख कर सारे कार्य करें व अपनेदेवालय में शनि का आसन अवश्य बनायेँ.
२२. प्रत्येक शुभ कार्य में पूर्व कार्य बाधा निवारण के लिए प्रार्थना करके हनुमान व शनि देव के नाम का नारियल फोड़े.
२३. प्रत्येक शनिवार को रात्रि में सोते समय आँखों में काजल या सुरमा लगायें व शनिवार का काला कपडा अवश्य पहने.
२४. महिलाओं से अपने भाग्य उदय के लिए सहयोग, समर्थन व मार्गदर्शन प्राप्त करें तो प्रगति होगी.
२५. अपनों से बड़ी उम्र वालें व्यक्ति का सहयोग प्राप्त करें व अपनी से छोटी जाती व निर्बल व्यक्ति की मदद करें.
२६. प्रति महा की अमावस्या आने से पूर्व अपने घर व व्यापार की सफाई व धुलाई अवश्य करें व तेल का दीपक जलाएं.
२७. शनि अमावस्या, शनि जयंती या शनिवार को बन पड़े तो शनि मंदिर में नंगे पैर जाएँ.
२८. घर बनाते समय काली टायल, काला मार्बल या काले रंग की कुछ वस्तु प्रयोग में लायें.

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शनि अमावस्या JUNE 8,2013

Wed, 06/05/2013 - 14:53
ज्योतिष के अनुसार शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है। शनि देव को अर्पित की जाने वाली वस्तुओं में लौहा, तेल, काले-नीले वस्त्र, घोड़े की नाल, काली उड़द, काले रंग का कंबल शामिल हैं।

- श्री नायक कहते है शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढय्या के साथ यदि कुंडली में कोई शनि दोष हो तो उसका निराकरण 8 जून को अवश्य करें।

मेष राशि: - शनि अमावस्या और शनि जयंती के दिन सरसों के तेल का दान गरीबों में दें।

वृषभ राशि: - शनि जयंती के दिन श्रद्घानुसार ज्वार गरीब व गौशाला में दान दें।

मिथुन राशि: - शनि जयंती एवं शनि अमावस्या के दिन उड़द के आटे की गोलियं बनाकर मछलियों को डालें।

कर्क राशि: - शनि जयंती एवं शनि के दिन भगवान शिव के शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। गरीब और अपाहिजों को भोजन कराना शुभ रहेगा।

सिंह राशि: - शनि जयंती के दिन मां भगवती के श्रीचरणों में गुलाब के 108 फूल अर्पित करें। श्री शनिदेव के श्रीचरणों में तेल चढ़ाएं।

कन्या राशि ;- शनि जयंती के दिन वट वृक्ष के पेड़ में जल अर्पित करें। तवा, अंगीठी व काले कपड़े का दान करना शुभ रहेगा।

तुला राशि: - शनि जयंती के दिन गरीब कन्याओं को दूध और दही का दान दें। साथ ही शनि मंदिर जरूर जाएं।

वृश्चिक राशि: - शनि जयंती के दिन नैतिकता का दामन पकड़े। साथ ही पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं। साबूत मसूर सफाई कर्मचार को दान में दें।

धनु राशि: - शनि जयंती के दिन श्रद्घानुसार अंधे व्यक्ति को भोजन कराना अति लाभकारी रहेगा। चने की दाल कुष्ठ रोगियों को दें।

मकर राशि: - शनि जयंती के दिन श्रद्घानुसार बाजारा पक्षियों को डालें। श्री शनिदेव के श्रीचरणों में पीले पुष्प अवश्य चढ़ाएं।

कुंभ राशि: - शनि जयंती के दिन 800 ग्राम दूध अपने ऊपर से 8 बार उसार करके 800 ग्राम उड़द के साथ बहते पानी में प्रवाह कर दें।

मीन राशि: - शनि जयंती पर मिट्टी के पात्र में श्रद्घानुसार शहद भरकर मंदिर में रखकर आ जाएं या वीराने में दबा दें।



Astrologer .. Rajesh Nayak
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दुर्गा सप्तशती

Tue, 05/21/2013 - 13:05
दुर्गा सप्तशती के अध्याय से कामनापूर्ति

1) प्रथम अध्याय- हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए |

2) दूसरा अध्याय- मुकदमे,झगडे आदि मे विजय पाने के लिए |

3) तीसरा अध्याय- शत्रु से छुटकारा पाने के लिए |

4) चतुर्थ व पंचम अध्याय- भक्ति,शक्ति तथा दर्शन के लिए |

5) छठा अध्याय- डर,शक बाधा हटाने के लिए |

6) सप्तम अध्याय-हर कामना पूर्ण करने के लिए |

7) अष्टम अध्याय-मिलाप व वशीकरण करने के लिए |

8)नवम व दशम अध्याय- गुमशुदा की तलाश एवं पुत्र प्राप्ति के लिए |

9) एकादश अध्याय- व्यापार व सुख संपती के लिए |

10) द्वादश अध्याय-मान सम्मान व लाभ के लिए|

11) त्रियोदश अध्याय- भक्ति प्राप्ति के लिए |
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शुगर,

Tue, 05/21/2013 - 13:04
शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।
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यदि कुण्ड़ली में

Tue, 05/21/2013 - 13:03
यदि कुण्ड़ली में शनि, राहू, केतु की अशुभ दृष्टि, इसकी अशुभ दशा , शनि की ढ़ैया या साढ़े साती चल रही तो-
एक सूखे मेवे वाला नारियल लेकर उस पर मुँह के आकार का एक कट करें. उसमें पाँच रुपये का मेवा और पाँच रुपये की चीनी का बुरादा भर कर ढ़क्कन को बन्द कर दें. पास ही किसी किसी पीपल के पेड़ के नीचे एक हाथ या सवा हाथ गढ्ढ़ा खोदकर उसमें नारियल को स्थापित कर दें. उसे मिट्टी से अच्छे से दबाकर घर चले जायें. ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर नही देखना. सभी प्रकार के मानसिक तनाव से छुटकारा मिल जायेगा
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धन प्राप्ति मंत्र

Tue, 05/21/2013 - 13:03
विशेष ऋग्वेद का प्रसिद्ध धन प्राप्ति मंत्र इस प्रकार है -

ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर।
भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्।
आ नो भजस्व राधसि।।´
ऋग्वेद (4/32/20-21)

हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं।

आप्तजनों से सुना है कि संसार भर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है, उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं - उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान मुझे इस अर्थ संकट से मुक्त कर दो।
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आँवला

Tue, 05/21/2013 - 13:02
आँवला

आँवला खाने से आयु बढ़ती है। इसका रस पीने से धर्म का संचय होता है और रस को शरीर पर लगाकर स्नान करने से दरिद्रता दूर होकर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।

मृत व्यक्ति की हड्डियाँ आँवले के रस से धोकर किसी भी नदी में प्रवाहित करने से उसकी सदगति होती है।

(स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, का.मा. 12.75) रत्येक रविवार, विशेषतः सप्तमी को आँवले का फल त्याग देना चाहिए। शुक्रवार, प्रतिपदा, षष्ठी, नवमी, अमावस्या और सक्रान्ति को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए।

आँवला-सेवन के बाद 2 घंटे तक दूध नहीं पीना चाहिए। 
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शिव

Tue, 05/21/2013 - 13:01
शिव को चढ़ाएं।

पहले उपाय के मुताबिक शिव पूजा में तरह-तरह के फूलों को चढ़ाने से अलग-अलग तरह की इच्छाएं पूरी हो जाती है। जानिए किस कामना के लिए कैसा फूल शिव को चढ़ाएं -
- वाहन सुख के लिए चमेली का फूल।
- दौलतमंद बनने के लिए कमल का फूल, शंखपुष्पी या बिल्वपत्र।
- विवाह में समस्या दूर करने के लिए बेला के फूल। इससे योग्य वर-वधू मिलते हैं।
- पुत्र प्राप्ति के लिए धतुरे का लाल फूल वाला धतूरा शिव को चढ़ाएं। यह न मिलने पर सामान्य धतूरा ही चढ़ाएं।
- मानसिक तनाव दूर करने के लिए शिव को शेफालिका के फूल चढ़ाएं।
- जूही के फूल को अर्पित करने से अपार अन्न-धन की कमी नहीं होती।
- अगस्त्य के फूल से शिव पूजा करने पर पद, सम्मान मिलता है।
- शिव पूजा में कनेर के फूलों के अर्पण से वस्त्र-आभूषण की इच्छा पूरी होती है।
- लंबी आयु के लिए दुर्वाओं से शिव पूजन करें।
- सुख-शांति और मोक्ष के लिए महादेव की तुलसी के पत्तों या सफेद कमल के फूलों से पूजा करें।
इसी तरह भगवान शिव की प्रसन्नता से मनोरथ पूरे करने के लिए शिव पूजा में कई तरह के अनाज चढ़ाने का महत्व बताया गया है। इसलिए श्रद्धा और आस्था के साथ इस उपाय को भी करना न चूकें। जानिए किस अन्न के चढ़ावे से कैसी कामना पूरी होती है -
- शिव पूजा में गेहूं से बने व्यंजन चढ़ाने पर कुंटुब की वृद्धि होती है।
- मूंग से शिव पूजा करने पर हर सुख और ऐश्वर्य मिलता है।
- चने की दाल अर्पित करने पर श्रेष्ठ जीवन साथी मिलता है।
- कच्चे चावल अर्पित करने पर कलह से मुक्ति और शांति मिलती है।
- तिलों से शिवजी पूजा और हवन में एक लाख आहुतियां करने से हर पाप का अंत हो जाता है।
- उड़द चढ़ाने से ग्रहदोष और खासतौर पर शनि पीड़ा शांति होती है।
इसी तरह भगवान शिव की प्रसन्नता से मनोरथ पूरे करने के लिए शिव पूजा में कई तरह के अनाज चढ़ाने का महत्व बताया गया है। इसलिए श्रद्धा और आस्था के साथ इस उपाय को भी करना न चूकें। जानिए किस अन्न के चढ़ावे से कैसी कामना पूरी होती है -
- शिव पूजा में गेहूं से बने व्यंजन चढ़ाने पर कुंटुब की वृद्धि होती है।
- मूंग से शिव पूजा करने पर हर सुख और ऐश्वर्य मिलता है।
- चने की दाल अर्पित करने पर श्रेष्ठ जीवन साथी मिलता है।
- कच्चे चावल अर्पित करने पर कलह से मुक्ति और शांति मिलती है।
- तिलों से शिवजी पूजा और हवन में एक लाख आहुतियां करने से हर पाप का अंत हो जाता है।
- उड़द चढ़ाने से ग्रहदोष और खासतौर पर शनि पीड़ा शांति होती है।
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तिलक

Fri, 05/03/2013 - 12:04
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि हर दिन के अलग अलग ग्रह स्वामी होते हैं। इसका असर हमारे ऊपर होता अगर वार के अनुसार तिलक लगाया जाए तो उस दिन से संबंधित ग्रह को अनुकूल बनाया जा सकता है।

सोमवार के स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं। चन्द्रमा मन का कारक ग्रह होता है इसे अनुकूल बनाए रखने के लिए श्रीखंड चंदन अथवा दही का तिलक करें। इससे मस्तिष्क शीतल और शांत रहता है।

मंगलवार का दिन मंगल ग्रह के प्रभाव में होता है। इस ग्रह का प्रतिनिधि रंग लाल है। उर्जा और कार्यक्षमता में वृ्द्धि के लिए मंगलवार के दिन रक्त चंदन अथवा सिंदूर का तिलक लगाना शुभ फलदायी रहता है।

बुधवार का दिन बुध ग्रह के प्रभाव में होता है। इसके स्वामी गणेश जी हैं। गणेश जी को सिंदूर का तिलक प्रिय है। इसलिए बुधवार के दिन सिंदूर लगाना चाहिए। इससे बौद्धिक एवं मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है।

गुरूवार के स्वामी धन के कारक ग्रह बृहस्पति हैं। गुरू को पीला रंग प्रिय है। प्रत्येक गुरूवार केसर, हल्दी, अथवा गोरोचन का तिलक लगाने से गुरू के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है। मन में सात्विक भाव बढ़ता है और आर्थिक समस्याओं में कमी आती है।

शुक्रवार के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। शुक्रवार के दिन सिंदूर अथवा रक्त चंदन का नियमित तिलक दांपत्य जीवन के तनाव को दूर करने में सहायक होता। भौतिक सुख-सुविधों में वृद्धि के लिए भी यह लाभप्रद रहता है।

शनिवार के स्वामी ग्रह शनि महाराज हैं। इन्हें अनुकूल बनाए रखने के लिए शनिवार के दिन विभूत अथवा रक्त चंदन का लेप करना चाहिए।

रविवार के स्वामी ग्रहों के राज सूर्य हैं। रविवार के दिन श्रीखंड चंदन अथवा रक्त चंदन लगाया जा सकता है।


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खुशहाली

Fri, 05/03/2013 - 12:02
घर में इस तरह लायें खुशहाली

अगर आप अपने घर में खुशहाली लाना चाहते हैं व शांति बनाये रखना चाहते हैं तो यह उपाय करें-शुक्ल पक्ष के बृहस्पति को यह क्रिया शुरू करें तथा 11 बृहस्पतिवार तक लगातार करें. घर या व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के एक कोने को गंगा जल से धो लें. इसके बाद स्वास्तिक बनाएं. उस पर चने की दाल तथा थोड़ा-सा गुड़ रख दे. इसके बाद स्वास्तिक को बार-बार देखें. अगर वह खराब हो जाए तो सामान को इकट्ठा करके जल प्रवाह करें.11 बृहस्पतिवार के बाद गणेश जी को सिंदूर लगाकर उनके सामने पांच लड्डू रखें तथा घर में खुशहाली व शांति का माहौल बनने लगेगा.

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पैसा बचायें

Fri, 05/03/2013 - 12:01
घर में पैसा बचायें इस तरह भी

आप पैसा बचाने के पक्ष में हैं और अधिक से अधिक धन कमाने के बाद भी कुछ बचा नहीं पा रहे हैं और घर में बरकत नही हो रही हो,पैसे कब आते हैं, कब चले जाते हैं कोई हिसाब-किताब नहीं तो इस उपाय को आजमायें-मंगलवार के दिन लाल चंदन,लाल गुलाब के फूल तथा रोली लें. इन सब चीजों को लाल कपड़े में बांधकर एक सप्ताह के लिए मंदिर में रख दें. घर पर धूपबत्ती किया करें. एक सप्ताह के बाद उनको घर की तथा दुकान की तिजोरियों में रख दें आप देखेंगे कि आपकी इच्छा साकार होने लगी है.
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लक्ष्मी

Sat, 04/27/2013 - 16:21
जानें, वो कैसे संकेत हैं जो लक्ष्मी खुश होने पर आपको देती है।

अगर आपके शरीर के दाहिने भाग में या सिधे हाथ में खुजली हो रही है तो समझे लक्ष्मी आने वाली है।

- बैंक में पैसे जमा करने जाते वक्त अगर रास्ते में गाय आ जाए तो आपके धन संबंधित सभी काम पूरे होते हैं।

- अगर रास्ते मे सुंदर स्त्री या कन्या दिख जाए तो भी इसे शुभ मानना चाहिए।

- लेन-देन के समय भी पैसा हाथ से छूट जाए तो समझना चाहिए धन लाभ होगा।

- अगर आपके यहाँ सोकर उठते से ही सुबह सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए तो ये समझना चाहिए आपके द्वारा दिया गया पैसा (उधार) बिना माँगे वापस आ जाएगा। ऐसे व्यक्ति को कभी खाली हाथ न लौटाएं।

- अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रहे हैं और जेब से पैसे गिरें तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत हैं।

- कहीं जाते समय नेवले द्वारा रास्ता काटना या नेवले का दिखना शुभ संकेत होता है। नेवला दिखना धन लाभ का संकेत होता है।

- आप सोकर उठे हों और उसी समय नेवला आपको दिख जाए तो गुप्त धन मिलने की संभावना रहती है।

- दिन में नेवला दिखना ठीक नहीं माना जाता, फिर भी कई स्थानों पर यह काल से बचाने वाला, धन प्राप्ति कराने वाला होता है।
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काली हल्दी

Sat, 04/27/2013 - 16:20
ऐसे सिद्ध करें काली हल्दी, बेशुमार दौलत मिलेगीतंत्र शास्त्र में काली हल्दी का उपयोग अनेक क्रियाओं में किया जाता है लेकिन इसके पहले इसे सिद्ध करना पड़ता है। इसकी विधि इस प्रकार है-

- धन प्राप्ति के लिए काली हल्दी यानी हरिद्रा तंत्र की साधना शुक्ल या कृष्ण पक्ष की किसी भी अष्टमी से शुरु की जा सकती है। इसके लिए पूजा सूर्योदय के समय ही की जाती है।

- सुबह सूर्यादय से पहले उठकर स्नान कर पवित्र हो जाएं।

- स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्योदय होते ही आसन पर बैठें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। ऐसा स्थान चुनें, जहां से सूर्यदर्शन में बाधा न आती हो।

- इसके बाद काली हल्दी की गाँठ का पूजन धूप-दीप से पूजा करें। उदय काल के समय सूर्यदेव को प्रणाम करें। आपके समक्ष रखी काली हल्दी की गाँठ को नमन कर भगवान सूर्यदेव के मंत्र 'ओम ह्रीं सूर्याय नम:' का 108 बार माला से जप करें।

- यह प्रयोग नियमित करें ।



- पूजा के साथ-साथ अष्टमी तिथि को यथासंभव उपवास रखें व ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

- हरिद्रा तंत्र की नियम-संयम से साधना व्रती को मनोवांछित और अनपेक्षित धन लाभ होता है। रुका धन प्राप्त हो जाता है। परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इस तरह एक हरिद्रा यानि हल्दी घर की दरिद्रता को दूर कर देती है।
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