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We cannot change the circumstances in which our soul chose to be born, but we can definitely change the circumstances in which we grow.ASTROLOGY, VASTU SASTRA, AURA, AROMA. SHIVYOG,ARTOF LIVING, ISHAYOG,OSHO AND NEWAGE MEDITATION अध्यात्म, ज्योतिष, यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र, वेद, पुराण, इतिहास, गुढ़-रहस्य समस्त समस्या का निराकरण सम्भव नहीं है, मात्र कुछेक समस्या का ही समाधान सम्भव है। Accurate Horoscope Analysis and Remedies for All Problems malhotrasubhashhttp://www.blogger.com/profile/12453811351942282454noreply@blogger.comBlogger3607125
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पितृदोष

Mon, 02/04/2013 - 15:53
पितृदोष निवारण

1 पितृदोष निवारण के लिए श्राद्ध करे। समयाभाव में भी सर्वपितृ अमावस्या या आश्विन कृष्ण अमावस्या के दिन श्राद्ध अवश्य श्रद्धापूर्वक करे।

2 गुरूवार के दिन सायंकाल के समय पीपल पेड की जड पर जल चढाकर सात बार परिक्रमा कर घी का दीपक जलाए।

3 प्रतिदिन अपने भोजन मे से गाय, कुते व कौओ को अवश्य खिलाए।

4 भागवत कथा पाठ कराए रूा श्रवण करे।

5 नरायण बली, नागबली आदि पितृदोष शांति हेतु करे।

6 माह में एक बार रूद्राभिषेक करे। संभव नही होने पर श्रावण मास में रूद्राभिषेक अवश्य करे।

7 अपने कुलदेवी-देवता का पुजन करते रहे।

8 श्राद्ध काल में पितृसुक्त का प्रतिदिन पाठ अवश्य करे।
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सफलता

Mon, 02/04/2013 - 15:51
सफलता प्राप्ति के लिए :

1. किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।

2॰ किसी भी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय घर की देहली के बाहर, पूर्व दिशा की ओर, एक मुट्ठी घुघंची को रख कर अपना कार्य बोलते हुए, उस पर बलपूर्वक पैर रख कर, कार्य हेतु निकल जाएं, तो अवश्य ही कार्य में सफलता मिलती है।

3॰ अगर किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू लें। उसपर 4 लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें : `ॐ श्री हनुमते नम:´। 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ ले कर जाएं। काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

4 चुटकी भर हींग अपने ऊपर से वार कर उत्तर दिशा में फेंक दें। प्रात:काल तीन हरी इलायची को दाएँ हाथ में रखकर “श्रीं श्रीं´´ बोलें, उसे खा लें, फिर बाहर जाए¡

प्रातः सोकर उठने के बाद नियमित रूप से अपनी हथेलियों को ध्यानपूर्वक देखें और तीन बार चूमें। ऐसा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। यह क्रिया शनिवार से शुरू करें।

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दिशाविशेषमें

Thu, 01/31/2013 - 12:24
कई वृक्ष ऐसे हैं, जो दिशाविशेषमें स्थित होनेपर शुभ अथवा अशुभ फल देनेवाले हो जाते हैं; जैसे -
पूर्वमें पीपल भय तथा निर्धनता देता हैं । परन्तु बरगद कामना - पूर्ति करता हैं ।
आग्नेयमें वट, पीपल, सेमल, पाकर तथा गूलर पीडा़ और मृत्यु देनेवाले हैं । परन्तु अनार शुभ है ।
दक्षिणमें पाकर रोग तथा पराजय देनेवाला है, और आम, कैथ, अगस्त्य तथा निर्गुण्डी धननाश करनेवाले हैं । परन्तु गूलर शुभ है ।
नै इमली शुभ है ।
दक्षिण - नै जामुन और कदम्ब शुब हैं ।
पश्चिममें वट होनेसे राजपीडा़, स्त्रीनाश व कुलनाश होता है, और आम, कैथ अगस्त्य तथा निर्गुण्डी धननाशक हैं । परन्तु पीपल शुभदायक है ।
वायव्यमें बेल शुभदायक है ।
उत्तरमें गूलर नेत्ररोग तथा ह्लास करनेवाला है । परन्तु पाकर शुभ है ।
ईशानमें आँवला शुभदायक है ।
ईशान - पूर्वमें कटहल एवं आम शुभदायक हैं ।
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भूमि-प्राप्तिके लिये अनुष्ठान

Thu, 01/31/2013 - 12:15

भूमि-प्राप्तिके लिये अनुष्ठान
किसी व्यक्तिको प्रयत्न करनेपर भी निवासके लिये भूमि अथवा मकान न मिल रहा हो, उसे भगवान् वराहकी उपासन करनी चाहिये । भगवान् वराहकी उपासना करनेसे, उनके मस्तक जप करनेसे, उनकी स्तुति - प्रार्थना करनेसे अवश्य ही निवासके योग्य भूमि या मकान मिल जाता है ।
स्कन्दपुराणके वैष्णवखण्डमें आया है कि भूमि प्राप्त करनेके इच्छुक मनुष्यको सदा ही इस मन्त्रका जप करना चाहिये -
ॐ नमः श्रीवराहाय धरण्ययुद्धारणाय स्वाहा ।
ध्यान - भगवान् वराहके अंगोंकी कान्ति शुद्ध स्फटिक गिरिके समान श्वेत है । खिले हुए लाल कमलदलोंके समान उनके सुन्दर नेत्र हैं । उनका मुख वराहके समान है, पर स्वरुप सौम्य है । उनकी चार भुजाऍ हैं । उनके मस्तकपर किरीट शोभा पाता हैं और वक्षःस्थलपर श्रीवत्सका चिह्ल है । उनके चार हाथोंमें चक्र, शङ्ख, अभय - मुद्रा और कमल सुशोभित है । उनकी बायीं जाधपर सागराम्बरा पृथ्वीदेवी विराजमान हैं । भगवान् वराह लाल, पीले वस्त्र पहने तथा लाल रंगके ही आभूषणोंसे विभूषित हैं । श्रीकच्छपके पृष्ठके मध्य भागमें शेषनागकी मूर्ति है । उसके ऊपर सहस्त्रदल कमलका आसन है और उसपर भगवान् वराह विराजमान हैं ।
उपर्युक्त मन्त्रके सङ्कर्षण ॠषि, वाराह देवता, पंक्ति छन्द और श्री बीज है । उसके चार लाख जप करे और घी व मधुमिश्रित खीरका हवन करे ।
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वास्तु

Wed, 01/30/2013 - 12:40
वास्तु टिप्स :

शयनकक्ष में झाडू न रखें। तेल का कनस्तर, अँगीठी आदि न रखें। व्यर्थ की चिंता बनी रहेगी। यदि कष्ट हो रहा है तो तकिए के नीचे लाल चंदन रख कर सोएँ।

यदि दुकान में चोरी होती है तो दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें।

दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए।

यदि दुकान का मुख्य द्वार अशुभ है या दक्षिण पश्चिम या दक्षिण दिशा में है तो ‘यमकीलक यंत्र' का पूजन करके स्थापना करें।

यदि सरकारी कर्मचारी द्वारा परेशान हैं तो सूर्य यंत्र की विधिवत पूजा करके दुकान में स्थापना करें।
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Lal Kitab Remedies

Mon, 01/21/2013 - 15:24
Lal Kitab Remedies
      Sun (Surya)
     
1.     Begin any important work after eating sweet and then drinking water.
2.     Do not accept anything in charity.
3.     Worship Lord Vishnu.
4.     Throw a copper coin in flowing water of a river.
5.     If there is marital discord or quarrels, put out fire with raw milk.

      Moon (Chandar)
     
1.     Get blessings of your mother by touching her feet.
2.     Receive some solid silver as gift from your mother.
3.     Do not get married at the age of 24.
4.     Do not do business dealing in milk and dairy products If moon is in Aries (Mesh) in your birth chart.
5.     If moon is in Scorpio (Vrishchak) in your birth chart, then keep some water in a bottle taken from cremation ground in your home. When water dries up, repeat the process.
6.     If moon is in Aquarius (Kumbha) in your horoscope then worship Lord Shiva. Chant the Mantra "Om Namah Shivaya."
7.     Keep a glass full of water near your head at night when you sleep. Next morning, pour it into the roots of an acacia (kikar) tree.

      Mars (Mangal)
     
1.     Keep fast on Tuesdays and donate vermillion (sindoor) to Lord Hanuman.
2.     Throw red lentil (masoor dal) or honey in the flowing waters of a river.
3.     Help your brother(s) from time to time. Do not annoy them.

      Mercury (Budha)
     
1.     Give green coloured bangles and clothes to eunuchs (hijras).
2.     Throw a copper coin  with a hole in it in a river.
3.     Feed cows with green fodder or grass.
4.     Donate a goat.
5.     Do not accept or wear talismans (tabij).
6.     Clean your teeth with alum (fitkari) daily.
7.     Have your nose pierced for 100 days.
8.     Wear copper coin in the neck.

      Jupiter (Guru)
     
1.     Eat  saffron (kesar).
2.     Apply saffron on your navel (nabhi) and tongue in the morning after sunrise and bathing.
3.     Apply saffron or turmeric paste on your forehead.
4.     Do not cut or get a ficus reliiosa (peepal) tree cut. Show respect to it.
5.     Put some saffron, some gold, some white grams, and turmeric in a yellow cloth. Tie it and give the small bundle in a holy place or temple.
6.     Give food to girls who are under nine.
7.     Wear solid gold in your neck.
8.     Do not keep large sized idols of gods and goddesses at home if Jupiter is in 7th house in your natal chart.
9.     Water a ficus religiosa (peepal ) tree for 43 days.

      Venus (Shukra)
     
1.     Throw a blue flower in dirty water or drain for 43 days.
2.     Use perfume, scent, cream, incense etc on Fridays.
3.     Worship goddess Lakshmi.
4.     Give curd, pure clarified butter (dhesi ghee) and camphor at holy place.
5.     Donate a cow in charity.

      Saturn (Shani)
     
1.     Feed crows for 43 days.
2.     Pour mustard oil or alcohol on the ground (soil) in the morning after sunrise for 43 days.
3.     Give baked bread (chapatis) with mustard oil applied on them to dogs and crows.
4.     Donate iron.

      (Dragon's Head)
     
1.     If suffering from the ill effects malefic Rahu then throw barley (jaun) or wheat (400 gms) in a river or canal (natural). (The water should be clean and flowing).
2.     Give cooked red lentil (red masoor pulses) to your sweeper and or help him in other ways.
3.     Donate radish.
4.     Throw raw coal (kacha koyala) in the river if facing a lot of difficulties and obstacles.
5.     Keep saunf or sugar in a red small bag under your pillow while sleeping.
6.     Keep a silver square plate with you.
7.     Bathe in sacred rivers or tanks.
8.     Eat in the kitchen when the kitchen fire is burning.

      (Dragon's Tail)
     
1.     Keep at home or feed a white and black dog (two colors only).
2.     Give 100 chapattis (baked bread) to dogs.
3.     Give / donate a cow (milk giving) and sesame seeds in charity.
4.     Apply saffron (kesar) on your forehead.
5.     Wear gold preferably in your ears.
6.     Give white and black blanket made of wool in a religous place  or temple.
7.     Ganesh pooja will be helpful.

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शिवजी के १७ मंत्र –

Mon, 01/21/2013 - 15:22
मासिक शिवरात्रि को शिवजी के १७ मंत्र – हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय अपने घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके
शिवजी का स्मरण करते करते ये 17 मंत्र बोलें । ‘जो शिव है वो गुरु है, जो गुरु है वो शिव है’
इसलिये गुरुदेव का स्मरण करते है । जिसकी गुरुदेव में दृढ़ भक्ति है वो गुरुदेव का स्मरण करते-करते मंत्र बोले |
आस-पास शिवजी का मंदिर तो जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवमंदिर जाकर दिया जलाकर ये १७ मंत्र बोले –

१) ॐ शिवाय नम:
२) ॐ सर्वात्मने नम:
३) ॐ त्रिनेत्राय नम:
४) ॐ हराय नम:
५) ॐ इन्द्र्मुखाय नम:
६) ॐ श्रीकंठाय नम:
७) ॐ सद्योजाताय नम:
८) ॐ वामदेवाय नम:
९) ॐ अघोरह्र्द्याय नम:
१०) ॐ तत्पुरुषाय नम:
११) ॐ ईशानाय नम:
१२) ॐ अनंतधर्माय नम:
१३) ॐ ज्ञानभूताय नम:
१४) ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
१५) ॐ प्रधानाय नम:
१६) ॐ व्योमात्मने नम:
१७) ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:


उक्‍त मंत्र बोलकर अपने इष्ट को, गुरु को प्रणाम करके यह शिव गायत्री मंत्र बोलें– ॐ तत्पुरुषाय विद्महे | महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात् ||
जिनके सिर पर कर्जा है वो शिवजी को प्रणाम करते हुये ये १७ मंत्र बोले कि मेरे सिर से ये भार उतर जाये |
मैं निर्भार जीवन जी सकूं, भक्ति में आगे बढ़ सकूं| केवल समस्या को याद न करता रहूँ |



- Shri Sureshanandji
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बारह मंत्र

Tue, 01/15/2013 - 10:58
बारा महीनों के बारह मंत्र अलग-अलग होते है | सूर्य को जल तो देते है केवल ये मंत्र जोड़ देना है तो बाह्य जीवन की विप्पतियाँ दूर हो सकती है और साधना के मार्ग में आनेवाली विपत्तियाँ भी दूर हो सकती है क्योकि सूर्य भगवान स्वयं गुरुभक्त है । इन मंत्रों से अर्घ्य देकर प्रार्थना करना कि सूर्य भगवान आपकी अपने गुरु ब्रहस्पतिजी के प्रति भक्ति है ऐसी मेरी मेरे बापूजी के प्रति हो जाय | मेरी मेरे गुरुदेव के प्रति हो जाय | ऐसी मुझे सद्बुद्धि दो | बारह महीनों के बारह मंत्र सूर्य भगवान को जल देते समय बोलो –

मार्गशीर्ष मास का मंत्र - ॐ धाताय नम:

पौष मास का मंत्र – ॐ मित्राय नम:

माघ मास का मंत्र – ॐ अर्यमाय नम:

फाल्गुन मास का मंत्र – ॐ पुषाय नम:

चैत्र मास का मंत्र - ॐ शक्राय नम:

वैशाख मास का मंत्र – ॐ अन्शुमानाय नम:

ज्‍येष्ठ मास का मंत्र – ॐ वरुणाय नम:

आषाढ़ मास का मंत्र – ॐ भगाय नम:

श्रावण मास का मंत्र – ॐ त्वष्टाय नम:

भाद्रपद मास का मंत्र – ॐ विवश्वते नम:

आश्विन मास का मंत्र – ॐ सविताय नम:

कार्तिक मास का मंत्र – ॐ विष्णवे नम:
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Upaya

Tue, 12/25/2012 - 13:39
Plants and Herbs for Upaya

Traditionally plants and herbs have been used as an upaya in India to get rid of maladies caused by grah chal [planetary combinations].

While using a plant or a herb for upaya the following should be kept in mind:

[a] If you want to bring home a piece of a plant or a herb for any upaya, then you should go to that tree or the herb a day before and with folded hands you should invite it to your house. You should pray that “ O [herbs name] please come to my house and relieve me from the misery I am suffering” etc.

[b] Next day, you can go and take a piece of the plant or the herb home.

[c] Do not use an iron tool to cut the piece. You can use either a wooden tool or your hands to dig the roots etc.

[d] Before cutting the piece of the plant or the root, you should say loudly that any spirit inhabiting the plant should leave it for a while at least till the time you leave the place.

[e] After having procured the piece, seek forgiveness for having hurt the plant.

[f] The piece should be brought home on the day associated with the planet or the nakshatra.
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Dec19,2012

Thu, 12/13/2012 - 11:37
जिनके घर में चिंता, कष्ट और बीमारी ज्यादा है | भविष्य पुराण में आया ही की मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी माने 19th Dec' 2012 को बुधवार के दिन सुबह सूर्य भगवान को तिल के तेल का दीपक दिखाये अर्घ्य दे |  सूर्य भगवान को अर्घ्य दो तो इस भाव से – मन में एक बार स्मरण कर लेना की भगवत गीता में आपने कहाँ है – “ज्योति श्याम रविरंशुमान” ये ज्योतियों में सूर्य मै हूँ .... तो मेरा अर्घ्य स्वीकार करो | मेरा ये प्रणाम स्वीकार करे |
तो उस दिन १९ दिसम्बर को लोटे में चावल, तिल, कुंकुम, केसर डालकर अर्घ्य दे | केसर न हो तो ऐसे ही कुंकुम डाल दे अर्घ्य दे, तिल का दिया दिखा दे |
फिर घर में भोजन बने और सब खाये उसके पहले दही और चावल थाली में लेकर सूर्य भगवान को भोग लगाये और प्रार्थना करे हमारे घर में आपके लिए ये प्रसाद तैयार किया है ये नैवेद्य आप सूर्य भगवान स्वीकार करे और हमारे घर में सब प्रकार से आनंद छाया रहे, सब निरोग रहे, दीर्घायु बने | ऐसा करके उनको भोग लगाये और प्रसाद में थोडा-सा छ्त पर रख दे घर के लोग भी प्रसाद में दही-चावल खुद भी खा ले |

Special Yog to remove tension, pain and diseases :-

This applies to all those homes who are troubled with lot of tension, pain and diseases. It is mentioned in Bhavishaya Purana that on seventh day of Shukla paksha in Margshirsh month i.e. on 19th December 2012, wednesday, one should light a lamp from sesame oil for Lord Surya. Offer prayers to Sun Lord - saying it is mentioned in Bhagwad Gita - "Jyoti Shaam Ravivanshumaan" , I am Sun among all lights.... please accept my oblations and prayers.

On that day, take a small bowl of water with rice, sesame, kumkum and kesar, and offer it to Sun God. One can use only kumkum, if kesar is not available. Then, bow to Him while showing the sesame lamp.
Before meals are taken on that day, place a little curd and rice on the plate and offer them to Sun God, pray to Him asking to accept the prasad which has been prepared today at home for Him. May peace, happiness, health and longevity always reside in this home. Saying such, offer the oblations and then offer a little of the curd rice to all in the family. Also, keep some of that on your home terrace.
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अमावस्या जो आयेगी 13 दिसम्बर

Thu, 12/13/2012 - 11:33
मार्गशीष मास की अमावस्या जो आयेगी 13 दिसम्बर गुरुवार के दिन माँ पार्वती जी का पूजन करें ।
पहले अपने गुरुदेव का पूजन करें गुरूर्ब्रहृमा गुरूर्विष्‍णु गुरूर्देवो महेश्‍वर... फिर माँ पार्वती जी का पूजन करें 11 मन्त्र बोलकर माँ पार्वती जी को प्रणाम करे :-

1. ॐ पार्वत्यै नमः
2. ॐ हेमवत्यै नमः
3. ॐ अम्बिकायै नमः
4. ॐ गिरीशवल्लभायै नमः
5. ॐ गंभीरनाभ्यै नमः
6. ॐ अपर्णायै नमः
7. ॐ महादेव्यै नमः
8. ॐ कंठकामिन्यै नमः
9. ॐ शणमुखायै नमः
10. ॐ लोकमोहिन्यै नमः
11.ॐ मेनकाकुक्षीरत्नायै नमः

ये 11 नाम कम से कम एक बार तो बोल ही लेनाए ज्यादा भी बोल सकतें है
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एक श्लोकी भागवत

Sat, 12/08/2012 - 14:32
एक श्लोकी भागवत देता हर कष्ट से मुक्ति ऐसे में नीचे लिखे इस एक मंत्र का विधि-विधान पूर्वक जप करने से संपूर्ण भागवत पढऩे या सुनने का फल मिलता है। इस श्लोक को एक श्लोकी भागवत कहते हैं। यह बहुत चमत्कारी श्लोक है। इसका जप करने से साधक को हर कष्ट से मुक्ति मिल जाती है।
एक श्लोकी भागवत
आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्।
माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्।।
कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।
सुबह जल्दी नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र का विधिवत पूजन करें। भगवान श्रीकृष्ण के चित्र के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जप करें। प्रतिदिन पांच माला जप करने से उत्तम फल मिलता है। आसन कुश का हो तो अच्छा रहता है। एक ही समय, आसन व माला हो तो यह मंत्र जल्दी ही सिद्ध हो जाता है।
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देवताओं के मंत्र

Sat, 12/08/2012 - 14:17
यहां कुछ ऐसे देवताओं के मंत्र बताए जा रहें हैं। जिनको घर, कार्यालय, सफर में मन ही मन बोलना भी संकटमोचक माना गया है। इन मंत्रों को बोलने के अलावा यथासंभव समय निकालकर साथ ही बताई जा रही पूजा सामग्री संबंधित देवता को जरूर चढ़ाएं -
शिव - पंचाक्षर मंत्र - नम: शिवाय, षडाक्षरी मंत्र ऊँ नम: शिवाय
पूजा सामग्री - जल व बिल्वपत्र।

श्री गणेश - ऊँ गं गणपतये नम:
पूजा सामग्री - दूर्वा, सिंदूर

विष्णु - ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
पूजा सामग्री - पीले फूल या वस्त्र

महामृंत्युजय मंत्र - ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धि पुष्टिवर्द्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धानान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌।
पूजा सामग्री - दूध मिला जल, धतूरा।

श्री हनुमान - ऊँ हं हनुमते नम:
पूजा सामग्री - सिंदूर, गुड़-चना
इन मंत्रों के जप के समय सामान्य पवित्रता का ध्यान रखें। जैसे घर में हो तो देवस्थान में बैठकर, कार्यालय में हो तो पैरों से जूते-चप्पल उतारकर इन मंत्र और देवताओं का ध्यान करें। इससे आप मानसिक बल पाएंगे, जो आपकी ऊर्जा को जरूर बढ़ाने वाले साबित होंगे।
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धन-धान्य

Sat, 12/08/2012 - 14:12
धन-धान्य  हर व्यक्ति चाहता है कि वह सुख-शांतिपूर्ण तरीके से जीवन जीए। कभी धन-धान्य की कमी न हो। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत भी करता है। लेकिन इतना सब करने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाता जैसा वह चाहता है। कुछ साधारण तांत्रिक उपाय करने पर जीवन को सुखी व शांतिपूर्ण बनाया जा सकता है।
- प्रतिदिन सुबह एक लौटे में पानी लेकर उसमें फूल, कुंकुम व चावल डालकर बरगद के पेड़ की जड़ में डालें तथा गाय को गुड़ व रोटी खिलाएं। ऐसा करने से आपके जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी।
- सूर्यास्त के समय रोज आधा किलो कच्चे दूध में 9 बूंदें शहद मिलाकर घर के सभी कमरों में छींटे और फिर चौराहे पर जाकर वह दूध रखकर लौट आएं। लौटते समय पीछे पलटकर न देंखे। 21 दिन तक यह टोटका करने से घर में जितनी भी नकारात्मक शक्तियां होती हैं स्वत: ही दूर चली जाती हैं और शांति का अनुभव होता है।
- प्रतिदिन सुबह नहाकर घर के प्रत्येक सदस्य के मस्तक पर चंदन का तिलक लगाने से भी परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं तथा धन-वैभव बढ़ता है।
- किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष में शनिवार के दिन नाव की कील से बना लॉकेट गले में धारण करने से समस्त प्रकार के दोषों का नाश हो जाता है तथा समृद्धि में वृद्धि होती है।
- शुक्रवार के दिन पीले कपड़े पर हल्दी की 7 साबूत गंाठ, 7 जनेऊ, 7 लग्नमंडप की सुपारी, गुड़ की 7 डली तथा 7 पीले फूल रखें। इसके पश्चात धूप-दीप से पूजा करें तथा इसे बांधकर तिजोरी या जहां आप पैसे रखते हैं, वहां रख दें। निश्चय ही इस टोटके से धन-धान्य में वृद्धि होगी।
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ग्रह के लिए कौन सी जड़?

Sat, 12/08/2012 - 14:08
किस ग्रह के लिए कौन सी जड़? - यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अशुभ प्रभाव दे रहा हो और सूर्य के लिए माणिक रत्न एफोर्ड नहीं कर सकते हैं तो, विकल्प के रूप में सूर्य को बल देने के लिए बेलपत्र की जड़ लाल या गुलाबी धागे में रविवार को धारण करें।
- चंद्र के शुभ प्रभाव के लिए सोमवार को सफेद वस्त्र में खिरनी की जड़ सफेद धागे के साथ धारण करें।
- मंगल को बलवान बनाने के लिए अनंत मूल या खेर की जड़ को लाल वस्त्र के साथ लाल धागे में मंगलवार को धारण करें।
- बुधवार के दिन हरे वस्त्र के साथ विधारा (आंधीझाड़ा) की जड़ को हरे धागे में पहनने से बुध देव प्रसन्न होते है।
- गुरु को बल देने के लिए केले की जड़ गुरुवार को पीले धागे में धारण करें।
- गुलर की जड़ को सफेद वस्त्र में लपेट कर शुक्रवार को सफेद धागे के साथ गले में धारण करने से शुक्र देव प्रसन्न होते हैं।
-शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को शनिवार के दिन नीले वस्त्र में धारण करना चाहिए।
-राहु को बल देने के लिए सफेद चंदन का टुकड़ा नीले धागे में बुधवार के दिन धारण करें।
- केतु के शुभ प्रभाव के लिए अश्वगंधा की जड़ नीले धागे में गुरुवार के दिन धारण करें।
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बिजनेस सफलता

Sat, 12/08/2012 - 14:04
बिजनेस  सफलता  कारोबार में असफलता का सामना करना पड़ रहा है? कर्ज में डूब रहे हैं। बिजनेस में सिर्फ नुकसान हो रहा हो तो। आप हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं पर कोई फायदा नहीं हो रहा हो तो नीचे लिखे टोटकों को अपनाकर आप बिजनेस में निश्चित सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
- कार्यस्थल पर अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। पूजाघर में हल्दी की माला लटकाएं। भगवान लक्ष्मी नारायण के मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाएं।- शनिवार के दिन रक्तगुंजा के इक्कीस दाने बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज दीप अवश्य लगाएं।- महीने के प्रथम गुरूवार से इस प्रयोग को शुरू करें नियमित रूप से186 दिन तक इस प्रयोग को करें। रोज पीपल या बरगद के नीचे चौ मुखी दीपक लगाएं। एक पाठ विष्णुसहस्त्रनाम रोज करें।- हर शाम गोधुली बेला में लक्ष्मी जी की तस्वीर के समक्ष गाय के घी का दीपक लगाएं। दीपक जलाने के बाद उसके अंदर अपने इष्ट देव का ध्यान करके एक इलायची डाल दें। इस प्रयोग को नियमित रूप से 186 दिन तक दोहराएं।- मिट्टी के पांच पात्र लेकर उसमें हर पात्र में सवा किलो जौ, सवा किलो उड़द, सवा किलो साबुत मुंग, सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों इन सभी को पांच पात्रों में भरकर पात्र के मुंह को लाल कपड़े से बांध दे। व्यवसायिक स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। एक साल बाद इन सभी पात्रों को अपने ऊपर से उतारकर नदी में प्रवाहित करें।
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Gayatri mantra

Thu, 11/29/2012 - 14:03
Why is the Gayatri mantra japa suggested pre-eminent among mantra chants? Because, any other japa (like Vishnu Sahasranamam, Hanuman Chalisa etc) when done after the Gayatri japa would lead to increased beneficial results. This is a common precept that one has to keep in mind always.
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Vishnu Sahasranama.

Thu, 11/29/2012 - 14:01
Shirdi Sai Baba on VSN<<<<<<<<<<<<<>>>>...


Shirdi Sai baba was a great man, much revered as a Saint who is even worshipped as a divine incarnation in several parts of India. His life and achievements were mentioned in detail in the work Sai Satcharitra.

In chapter 27 of Sai Satcharita there is a reference to Shirdi Sai Baba emphatically advising his disciple to read Vishnu Sahasranama...."Oh Shama, this book is very valuable and efficacious, so I present it to you, you read it. Once I suffered intensely and My heart began to palpitate and My life was in danger. At that critical time, I hugged this book to My heart and then, Shama, what a relief it gave me! I thought that Allah Himself came down and saved Me. So I give this to you, read it slowly, little by little, read daily one name at least and it will do you good.
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COW

Wed, 11/21/2012 - 15:25
  • Cow (Kamadhenu), White Elephant (Iravatha), White Swan and White Eagle find place anywhere in the heaven, and hence are sacred.
     
  • Among the above only Cow is worshipped even in the heaven. The Devas also worship Cow to fulfil their purposes.
     
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Ved Thumb

Wed, 11/21/2012 - 15:12
Ved Thumb
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