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Wallflux: अन्तर्जाले संस्कृतव्याप्तै, संस्कृते लिखित ब्लाग् पृष्ठानां एकत्र प्रदर्शयितुं, विश्वव्याप्त-संस्कृतानुरागि...
Updated: 4 weeks 1 day ago

Group wall post by अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी

Fri, 08/16/2013 - 13:31
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: (अष्टकस्य स्लोक क्र. ३ तथा ४ तथाच पूर्वदत्तं श्लोक-द्वयम्............) ************************************************ नमत नमत देवं..............(कै. आपटीकर विरचितम्) नमत नमत देवं दीनबन्धुं दयालुं भजत भजत शर्वं शान्तरूपं शरण्यम् । स्मरत ...
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Wed, 08/14/2013 - 16:36
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: नमत नमत देवं..............(कै. आपटीकर विरचितम्) नमत नमत देवं दीनबन्धुं दयालुं भजत भजत शर्वं शान्तरूपं शरण्यम् । स्मरत मनसि रुद्रं भीमरूपं भवारिं निजहृदि विलसन्तं शंकरं ध्यायताद्यम् ।।१।। गहन
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Wed, 08/14/2013 - 16:36
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: नमत नमत देवं..............(कै. आपटीकर विरचितम्) नमत नमत देवं दीनबन्धुं दयालुं भजत भजत शर्वं शान्तरूपं शरण्यम् । स्मरत मनसि रुद्रं भीमरूपं भवारिं निजहृदि विलसन्तं शंकरं ध्यायताद्यम् ।।१।। गहन
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Wed, 08/14/2013 - 10:31
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: <ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ> गोकोटिदानं ग्रहणेषु काशी प्रयागगङ्गायुतकल्पवासः । यज्ञायुतं मेरुसुवर्णदानं गोविंदनाम्ना न कदापि तुल्यम...
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Wed, 08/14/2013 - 10:31
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: <ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ><ॐ> गोकोटिदानं ग्रहणेषु काशी प्रयागगङ्गायुतकल्पवासः । यज्ञायुतं मेरुसुवर्णदानं गोविंदनाम्ना न कदापि तुल्यम...
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Mon, 08/12/2013 - 20:45
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: सानंदमानंदवने..वसन्तमानन्दकन्दं..हतपापवृन्दम्..। वाराणसीनाथमनाथनाथं....श्रीविश्वनाथं..शरणं..प्रपद्ये..।।
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Mon, 08/12/2013 - 20:45
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: सानंदमानंदवने..वसन्तमानन्दकन्दं..हतपापवृन्दम्..। वाराणसीनाथमनाथनाथं....श्रीविश्वनाथं..शरणं..प्रपद्ये..।।
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Mon, 08/12/2013 - 18:32
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: त्यज खेदं सदानघे। - विजयन् पट्टाम्बी।(महोदयानां सौजन्येन.....अत्र स्थापितम्) पुत्री स्वसा तथा जाया माता मातामहीति च। सुवर्षे भारते स्त्रीणां जीवचक्रगतिस्मृता।। पितरं लीलया पुत्री मातरं ...
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Mon, 08/12/2013 - 18:32
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: त्यज खेदं सदानघे। - विजयन् पट्टाम्बी।(महोदयानां सौजन्येन.....अत्र स्थापितम्) पुत्री स्वसा तथा जाया माता मातामहीति च। सुवर्षे भारते स्त्रीणां जीवचक्रगतिस्मृता।। पितरं लीलया पुत्री मातरं ...
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Sun, 08/11/2013 - 15:08
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: धारयते अनेन इति धर्मः ।.....जो हमे धारण करता है वह है धर्म । धर्मो रक्षति रक्षितः ।जो धर्मकी रक्षा करता है ( धर्मका पालन करता है),धर्म उसकी रक्षा करता है । अतः हमे वेदोक्त धर्माज्ञाओंका बडी निष्ठा
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Sun, 08/11/2013 - 05:37
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: धारयते अनेन इति धर्मः ।.....जो हमे धारण करता है वह है धर्म । धर्मो रक्षति रक्षितः ।जो धर्मकी रक्षा करता है ( धर्मका पालन करता है),धर्म उसकी रक्षा करता है । अतः हमे वेदोक्त धर्माज्ञाओंका बडी निष्ठा
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अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: धारयते अनेन इति धर्मः ।.....जो हमे धारण करता है वह है धर्म । धर्मो रक्षति रक्षितः ।जो धर्मकी रक्षा करता है ( धर्मका पालन करता है),धर्म उसकी रक्षा करता है । अतः हमे वेदोक्त धर्माज्ञाओंका बडी निष्ठा
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Sat, 08/10/2013 - 18:15
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: निसर्गसुंदरः केरळ-प्रदेशः ............ एकं सुंदरं मन्दिरम्................... दीप-प्रज्वलनम्...अत्र..तत्र..सर्वत्र... दीप-स्तंभ-द्वयम्...............मङ्गलम्.....प्रसन्नम् वातावरणम्.... मंदिर-सेवकः शङ्खवादनार्थम् सिद्धः सा
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अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: निसर्गसुंदरः केरळ-प्रदेशः ............ एकं सुंदरं मन्दिरम्................... दीप-प्रज्वलनम्...अत्र..तत्र..सर्वत्र... दीप-स्तंभ-द्वयम्...............मङ्गलम्.....प्रसन्नम् वातावरणम्.... मंदिर-सेवकः शङ्खवादनार्थम् सिद्धः सा
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Thu, 08/08/2013 - 21:52
Rushikesh Vekariya posted a photo on SanskritCentral's wall: http://rushikeshvekariya.blogspot.in/
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Wed, 08/07/2013 - 11:11
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: नारायणेति..मंत्रोSस्ति.वागस्ति..वशवर्तिनी.।तथापि.नरके.लोके.पतन्त्येतद्भुतम्.। नारायण-मंत्रस्य माहात्म्यं वर्णयितुम् सहस्र-मुख-शेषः अपि असमर्थः,वेदाः अपि नेति नेति उक्त्वा मौनं स्वीकृतव
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Wed, 08/07/2013 - 11:11
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: नारायणेति..मंत्रोSस्ति.वागस्ति..वशवर्तिनी.।तथापि.नरके.लोके.पतन्त्येतद्भुतम्.। नारायण-मंत्रस्य माहात्म्यं वर्णयितुम् सहस्र-मुख-शेषः अपि असमर्थः,वेदाः अपि नेति नेति उक्त्वा मौनं स्वीकृतव
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Wed, 08/07/2013 - 10:51
अनन्त पंढरीनाथ कुलकर्णी wrote on SanskritCentral's wall: @@@श्रीकृष्णं वंदे जगद्गुरुम् ................@@@ वयं सर्वे जगद्गुरुं श्रीकृष्णं वंदामहे................।. सः जगद्गुरुः मोहग्रस्तान् जनान् गीतां श्रावयति.....मोहं च विनाशयति.। मोह-मुक्तःजनःस्वधर्मस्य पालनं करोत
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